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दीदार पर बनी शायरी का संग्रह - Collection OF Deedar Shyari


दीदार  पर बनी शायरी का संग्रह - Collection OF Deedar Shyari


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दीदार  पर बनी शायरी का संग्रह 




देखना हसरत-ए-दीदार इसे कहते हैं
फिर गया मुँह तिरी जानिब दम-ए-मुर्दन अपना

ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर लखनवी

क्यूँ जल गया न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख कर
जलता हूँ अपनी ताक़त-ए-दीदार देख कर

मिर्ज़ा ग़ालिब

आफ़रीं तुझ को हसरत-ए-दीदार
चश्म-ए-तर से ज़बाँ का काम लिया

जलील मानिकपूरी

दीदार की तलब के तरीक़ों से बे-ख़बर
दीदार की तलब है तो पहले निगाह माँग

आज़ाद अंसारी

कासा-ए-चश्म ले के जूँ नर्गिस
हम ने दीदार की गदाई की

मीर तक़ी मीर

आईना कभी क़ाबिल-ए-दीदार न होवे
गर ख़ाक के साथ उस को सरोकार न होवे

इश्क़ औरंगाबादी

कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवा
हसरत-ए-दीदार ने आँखों को अंधा कर दिया

हैदर अली आतिश

मेरी आँखें और दीदार आप का
या क़यामत आ गई या ख़्वाब है

आसी ग़ाज़ीपुरी

दिल को नियाजे-हसरते-दीदार कर चुके,
देखा तो हममें ताकते-दीदार ही नहीं।

मिर्जा गालिब

चाहता हूँ तेरा दीदार मयस्सर हो जाये,
सोचता हूँ मुझे ताबे-नजर भी होगी?

तालिब देहलवी

दीदार  पर बनी शायरी का संग्रह - Collection OF Deedar Shyari

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