ठहर ठहर के कोई दिल में झांकता क्यों है - मुहम्मद अली साहिल
Thahar - Thahar Ke Dil Men Jhankata Kyun Hai. Mohammad Ali Sahil
येे दर्द का हैे मुसल्सल जोे सिलसिला क्यों है
ठहर ठहर के कोई दिल में झांकता क्यों है।।
नहीं है कोई तअल्लुक़ अगर मेरा तुझसे
तो फिर ये चेहरा तिरा ज़र्द ज़र्द सा क्यों है।।
फ़रेब खा के भी वादे पे ऐतेबार किया।
सुबूत फिर भी वफ़ा का वह मांगता क्यों है।।
अगर है जीतना मक़सद तो फिर बताये कोई।
वह जान-बूझ के बाज़ी को हारता क्यों है।।
अजीब लोग हैं उस पर सवाल करते हैं।
कभी तो सोचें कि आखिर वह ग़मज़दा क्यों है।।
अगर है दौरे तरक़्क़ी तो दौरे हाज़िर में।
बताओ मुझको कि हर सम्त करबला क्यों है।।
रग़ो में एक ही जैसा है खून जब ’साहिल’
तो फिर ये सोच सभी की जुदा जुदा क्यों है।।
- ठहर ठहर के कोई दिल में झांकता क्यों है - मुहम्मद अली साहिल
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